शस्त्र, शास्त्र और साफा के माध्यम से बेटियां बन रहीं आत्मनिर्भर और संस्कारित : डॉ. मनीषा सिंह

जयपुर। शौर्य संस्कार सेवा संगठन द्वारा आयोजित एक माह के निःशुल्क शौर्य एवं संस्कार प्रशिक्षण शिविर में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मनीषा सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं और प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बालिकाओं का उत्साहवर्धन किया.  इस अवसर पर उन्होंने बालिकाओं द्वारा तलवारबाजी, लाठी संचालन, आत्मरक्षा कौशल एवं साफा बांधने की कला का प्रदर्शन देखा तथा उनके आत्मविश्वास और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर बेटियों को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और संस्कारित नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, साथ ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।
डॉ. मनीषा सिंह ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में जहां नई पीढ़ी तेजी से बदलते परिवेश का सामना कर रही है, वहीं शस्त्र, शास्त्र और साफा के माध्यम से बेटियों का अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से जुड़ना अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का प्रशिक्षण आज समय की आवश्यकता है और यह देखकर प्रसन्नता होती है कि बेटियाँ न केवल अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक हो रही हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और राजस्थान की गौरवशाली विरासत को भी आत्मसात कर रही हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान की पहचान केवल उसकी ऐतिहासिक धरोहरों से नहीं, बल्कि उसके शौर्य, संस्कार और स्वाभिमान से भी है. जब बेटियाँ साफा बाँधने जैसी परंपराओं को सीखती हैं और आत्मरक्षा के गुर हासिल करती हैं तो वे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश देती हैं कि नारी शक्ति हर क्षेत्र में सक्षम और समर्थ है।
शौर्य संस्कार सेवा संगठन की संस्थापिका विजयलक्ष्मी शेखावत ने बताया कि शिविर का उद्देश्य बालिकाओं को शारीरिक, मानसिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना है. एक माह तक चलने वाले इस प्रशिक्षण शिविर में लगभग 80 बालिकाएं भाग ले रही हैं। उन्हें तलवारबाजी, लाठी संचालन, दंड शास्त्र, आत्मरक्षा तकनीक, योग, संस्कृत श्लोक, नैतिक शिक्षा एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. शिविर में गुरु खुशी नरूका और  दिव्यांशी शेखावत द्वारा बालिकाओं को तलवारबाजी और लाठी संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके अलावा , कृष्णवी शक्तावत, याचिका तंवर, साक्षी शेखावत, पुष्पा शेखावत, राज कंवर और बिंदिया राठौड़ भी प्रशिक्षण व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. वहीं ज्योतिर्विद पंडित फणींद्र शास्त्री संस्कृत श्लोकों के माध्यम से बालिकाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ रहे हैं तथा योगालय के संस्थापक आशुतोष सक्सेना नियमित योग एवं प्राणायाम का प्रशिक्षण दे रहे हैं। 

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